शरदीय नवरात्रि 2026: आज से शुरू होगा मां शैलपुत्री की पूजा का महापर्व, जानें घट स्थापना का शुभ उत्सव और विधि

आज से शारदीय नवरात्रि का पर्व शुरू हो गया है। आज नवरात्रि का पहला दिन है और यह दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री को समर्पित होता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग सिद्धांतों की पूरी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी।

शरदीय नवरात्रि 2026: आज से शुरू होगा मां शैलपुत्री की पूजा का महापर्व, जानें घट स्थापना का शुभ उत्सव और विधि

आज से शारदीय नवरात्रि का पर्व शुरू हो गया है। आज नवरात्रि का पहला दिन है और यह दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री को समर्पित होता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग सिद्धांतों की पूरी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। सिद्धांत है कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से भक्तों को अखंड एकता, आरोग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

आइए जानते हैं मां शैलपुत्री की पूजा विधि, मंत्र, भोग और आज घट स्थापना का शुभ उत्सव:

1. माँ शैलपुत्री का स्वरूप

'शैल' का अर्थ है पर्वत और 'पुत्री' का अर्थ है बेटी। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने का कारण शैलपुत्री कहा जाता है। मां शैलपुत्री नंदी (बैल) पर सवार हैं। इनके तीसरे हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल होता है। करुणा, स्नेह और धैर्य की देवी मानी जाती है।

2. घट स्थापना (कलश स्थापना) का शुभ उत्सव

नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना का विशेष महत्व होता है। आज घाट स्थापना के लिए शुभ पूजनोत्सव हैं:

  • कलश स्थापना शुभ उत्सव: सुबह 06:15 मिनट से लेकर 07:30 मिनट तक (अमृत चौघड़िया)

  • अभिजीत कृष्ण (सबसे उत्तम): सुबह 11:46 मिनट से दोपहर 12:33 मिनट तक।

3. मां शैलपुत्री पूजा विधि

  • सुबह जल्दी बालों के स्नान आदि से निवृत्त छोटे कपड़े (पीले रंग के कपड़े उत्तम होते हैं) धारण करें।

  • पूजा घर या साफ स्थान पर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

  • इसके बाद कलश स्थापना (घट स्थापना) करें। कलश में जल, गंगाजल, सूखा, सुपारी, और अक्षत मिलता है। कलश के ऊपर नारियल भंडार।

  • मां शैलपुत्री का ध्यान उन्हें अक्षत, सिन्दूर, धूप, दीप और पुष्प (विशेष सफेद या पीले फूल) से करते हैं।

  • माँ को देसी घी का दीपक जलाएं और आरती करें।

4. माँ शैलपुत्री का प्रिय भोग

माँ शैलपुत्री कोगाय के घीका भोग अति प्रिय है। सिद्धांत है कि माँ को घी से मुक्ति दिलाने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और भक्त को सभी व्याधियों से मुक्ति मिलती है। आप माँ को घी से बनी मिठाई का पात्र भी बना सकते हैं।

5. माँ शैलपुत्री का मंत्र

पूजा के दौरान इस मंत्र का 108 बार जाप करें:

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

या फिर:

वन्दे अध्ययनलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखरम्। वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥