एक युग के अंत का प्रदर्शन
नाना पाटेकर सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि अभिनय की एक पूरी पाठशाला थे। 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'तिरंगा', 'अग्निसाक्षी' और 'वेलकम' जैसी अनगिनत फिल्मों में उन्होंने जो भी किरदार निभाए, वे हमेशा भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर हो गए। 'क्रांतिवीर' ने अपने संवाद में कहा- ''यह मुसलमान का खून है, यह हिंदू का खून है... बताओ कौन मुसलमान है, कौन सा हिंदू है?'' -आज भी हर भारतीय की जंज़ी पर कटा-बासा है।
सामाजिक मूल्य और 'नाम फाउंडेशन'
परदे पर अपने आक्रामक और दमदार किरदारों के लिए जाने वाले नाना पाटेकर असल जिंदगी में बेहद आकर्षक और जमीन से जुड़े इंसान थे। महाराष्ट्र के किशोर पीड़ित किसानों की मदद के लिए उन्होंने 'नाम फाउंडेशन' की स्थापना की, जिसके जरिए उन्होंने हजारों किसानों और उनके परिवारों की जिंदगी बदल दी।
फिल्म इंडस्ट्री और दिग्गजों ने शेयर किया शोक
उनकी मौत की खबर आई सिनेमा जगत के कई दिग्गजों, राजनीतिक दिग्गजों और उनके करोड़ों शेयरधारकों ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी भवानी वीरता की।
अमिताभ बच्चन: "नाना एक ऐसे कलाकार थे, जिनकी जगह कोई नहीं ले सकता। उनका जाना सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है।"
अक्षय: "नाना भाई का जाना मेरे लिए पर्सनल डैमेज है। 'वेलकम' के सेट पर रसायनज्ञ डे कुमार और उनकी सादगी हमेशा याद रहेगी।"
नाना पाटेकर का भारतीय सिनेमा के उस दौर में अंत हुआ जहां सादगी, संघर्ष और कला का अद्भुत समागम देखने को मिला। वे भले ही हमारे बीच न रहे हों, लेकिन अपनी कालजयी फिल्मों और सामाजिक साहित्य के माध्यम से वे हमेशा अमर रहेंगे।