'संस्कृत बाहर की भाषा, हिंदी-उर्दू देश की' — कांग्रेस सांसद डॉ. मो. जावेद के बयान से बिहार में सियासी भूचाल

किशनगंज से कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद के एक ताजा बयान ने राज्य के सियासी गलियारे में आग लगा दी है। सांसद जावेद ने दावा किया है कि "हिंदी और उर्दू तो इसी देश की भाषाएं हैं, लेकिन संस्कृत बाहर से आई हुई भाषा है।"

'संस्कृत बाहर की भाषा, हिंदी-उर्दू देश की' — कांग्रेस सांसद डॉ. मो. जावेद के बयान से बिहार में सियासी भूचाल

पूर्णिया: बिहार के नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू की पढ़ाई शुरू न होने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े भाषाई और राजनीतिक घमासान में बदल गया है। किशनगंज से कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद के एक ताजा बयान ने राज्य के सियासी गलियारे में आग लगा दी है। सांसद जावेद ने दावा किया है कि "हिंदी और उर्दू तो इसी देश की भाषाएं हैं, लेकिन संस्कृत बाहर से आई हुई भाषा है।"

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, यह पूरा मामला बिहार सरकार द्वारा हाल ही में खोले गए नए डिग्री कॉलेजों से जुड़ा है। कांग्रेस सांसद का आरोप है कि नीतीश सरकार ने इन नए कॉलेजों में उर्दू विषय की पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं की है। उन्होंने इसे उर्दू भाषी छात्र-छात्राओं के साथ सरासर नाइंसाफ़ी और शिक्षा के अधिकार व भाषाई विविधता पर हमला करार दिया।

सांसद जावेद ने सरकार से तुरंत इस फैसले पर पुनर्विचार करने और सभी नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू विभाग शुरू करने की मांग की, ताकि छात्रों को अपनी पसंदीदा भाषा में उच्च शिक्षा मिल सके।

बयान पर छिड़ी रार

उर्दू के हक में आवाज उठाते-उ उठाते कांग्रेस सांसद सीधे संस्कृत पर टिप्पणी कर बैठे। उनका यह कहना कि 'संस्कृत बाहर की भाषा है', अब उनके लिए गले की फांस बनता जा रहा है।

सांसद का विवादित बयान: "हिंदी और उर्दू इस देश की भाषाएं हैं, लेकिन संस्कृत बाहर से आई भाषा है।"इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनलों तक पर बहस छिड़ गई है। जहां एक तरफ विपक्ष इसे तुष्टीकरण की राजनीति बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ इतिहास और भाषाई विशेषज्ञों के बीच भी इसे लेकर तीखी चर्चा शुरू हो गई है। बिहार की सियासत में इस बयान के बाद आने वाले दिनों में टकराव और बढ़ने के आसार हैं।