सुरों के सारथी पंडित भरत व्यास: जिन्होंने सीधे आत्मा को छूने वाले कालजयी गीत लिखे

बेमिसाल फनकारों में एक नाम पंडित भरत व्यास का है. 'ऐ मालिक तेरे बंदे हम' और 'ज्योत से ज्योत जलाते चलो' जैसे कभी न भूले जाने वाले गीतों की रचना करने वाले भरत व्यास हिंदी सिनेमा के एक ऐसे दिग्गज गीतकार और लेखक थे, जिनकी लेखनी ने इतिहास पर एक अमिट छाप छोड़ी।

सुरों के सारथी पंडित भरत व्यास: जिन्होंने सीधे आत्मा को छूने वाले कालजयी गीत लिखे

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे बेहतरीन गीतकार हुए हैं, जिन्होंने शब्दों और भावनाओं को इतनी कुशलता से पिरोया कि उनकी रचनाएं सदाबहार बन गईं। उन्हीं बेमिसाल फनकारों में एक नाम पंडित भरत व्यास का है. 'ऐ मालिक तेरे बंदे हम' और 'ज्योत से ज्योत जलाते चलो' जैसे कभी न भूले जाने वाले गीतों की रचना करने वाले भरत व्यास हिंदी सिनेमा के एक ऐसे दिग्गज गीतकार और लेखक थे, जिनकी लेखनी ने इतिहास पर एक अमिट छाप छोड़ी।
चुरू से कलकत्ता और फिर बॉलीवुड का सफर
पंडित भरत व्यास का जन्म 6 जनवरी 1918 को राजस्थान के बीकानेर में हुआ था, लेकिन वे मूल रूप से चुरू जिले के निवासी थे। बचपन से ही शब्दों से खेलने का शौक रखने वाले भरत व्यास ने अपनी मैट्रिक तक की पढ़ाई चुरू से ही पूरी की। इसके बाद वे कलकत्ता चले गए, जहां के साहित्यिक माहौल ने उनकी लेखनी को और निखारा।
उनका लिखा पहला गीत 'आओ वीरो हिलमिल गाए वंदे मातरम' था। इसके बाद साल 1943 में आई फिल्म 'दुहाई' से उन्होंने हिंदी सिनेमा में बतौर लेखक और गीतकार कदम रखा. करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने अभिनय (acting) में भी हाथ आजमाया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था—उन्हें असल पहचान उनकी असाधारण और जादुई लेखनी से ही मिली।
आसान शब्दों में छिपी भावनाओं की गहराई
भरत व्यास बॉलीवुड के सबसे मशहूर गीतकारों में से एक थे। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे बेहद आसान और सरल शब्दों के जरिए आम इंसान के दिल को छू लेते थे। उनके गीतों में गहरी सूफियाना सोच, सादगी और इंसानी जज्बातों की मुकम्मल समझ दिखाई देती थी। अपने शानदार करियर में उन्होंने 125 से अधिक फिल्मों के लिए गीत लिखे।
सदाबहार गीतों का खजाना
उनकी कलम से निकले कुछ ऐसे नगमे हैं जो आज भी उतने ही तरोताजा लगते हैं।
आधा है चंद्रमा रात आधी
आ लौट के आजा मेरे मीत
जरा सामने तो आओ छलिए
तू छिपी है कहां
तेरा सुर और मेरे गीत
यूं ही तुम मुझसे बात करती रहो
जीवन में पिया तेरा साथ रहे
दिल का खिलौना हाय टूट गया
मस्ताना मौसम
तेरी शहनाई बोले
4 जुलाई 1982 को हिंदी सिनेमा का यह महान कवि और गीतकार हमेशा के लिए खामोश हो गया, लेकिन अपनी अमर लेखनी और कालजयी गीतों के रूप में पंडित भरत व्यास आज भी हर संगीत प्रेमी के दिल में जिंदा हैं।