​पूर्णिया का मखाना पहुंचा ग्रीस: APEDA की पहल से यूरोप में बढ़ा बिहार का डंका, किसानों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय दाम

बिहार के कृषि परिदृश्य और सीमांचल-मिथिलांचल के मखाना उत्पादक किसानों के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और बेमिसाल स्वाद के लिए जाने जाने वाले पूर्णिया के मखाने ने अब यूरोपीय देश ग्रीस (Greece) के बाजारों में कदम रख दिया है।

​पूर्णिया का मखाना पहुंचा ग्रीस: APEDA की पहल से यूरोप में बढ़ा बिहार का डंका, किसानों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय दाम

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विशेष रिपोर्ट | डिजिटल डेस्क
​पूर्णिया/पटना: बिहार के कृषि परिदृश्य और सीमांचल-मिथिलांचल के मखाना उत्पादक किसानों के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और बेमिसाल स्वाद के लिए जाने जाने वाले पूर्णिया के मखाने ने अब यूरोपीय देश ग्रीस (Greece) के बाजारों में कदम रख दिया है। केंद्र सरकार के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के मार्गदर्शन में पूर्णिया से 1 मीट्रिक टन (1,000 किग्रा) पॉप्ड मखाने (फूल मखाना) की पहली व्यावसायिक खेप ग्रीस के लिए सफलतापूर्वक रवाना की गई है।
​इस ऐतिहासिक निर्यात से न केवल वैश्विक स्तर पर बिहार के मखाने की साख मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय किसानों को मंडी के सीमित भाव और बिचौलियों के चंगुल से मुक्ति मिलकर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार का बंपर दाम मिलेगा।
​मुंद्रा पोर्ट से ग्रीस के पिराएस पोर्ट तक का सफर
​इस निर्यात खेप की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग पूर्णिया के बेलौरी स्थित इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट द्वारा की गई है। इसके बाद दिल्ली की एसएस फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से गुजरात के मुंद्रा (Mundra) पोर्ट से समुद्री मार्ग द्वारा इसे ग्रीस के ऐतिहासिक पिराएस (Piraeus) पोर्ट भेजा गया।
​विशेष बात यह है कि इस पहली विदेशी खेप के लिए स्थानीय मखाना उत्पादकों को घरेलू मंडी के औसत भाव की तुलना में काफी बेहतर और प्रीमियम मूल्य प्राप्त हुआ है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे स्थानीय किसानों को सीधे वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने वाला एक क्रांतिकारी कदम करार दिया है।
​बिचौलियों का खेल खत्म: सीधा ग्लोबल कनेक्शन
अब तक सीमांचल के किसान कड़ी मेहनत से मखाने की उपज तैयार करते थे, लेकिन एक्सपोर्ट नेटवर्क और ब्रांडिंग की कमी के कारण अधिकांश मुनाफा बिचौलिए उठा लेते थे। APEDA द्वारा किसानों और स्थानीय FPOs (किसान उत्पादक संगठनों) को दी जा रही पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लैब टेस्टिंग और एक्सपोर्ट सर्टिफिकेशन की ट्रेनिंग से अब किसान खुद निर्यातक बनने की ओर अग्रसर हैं।
​दुनिया भर में बिहार के मखाने का दबदबा
​मखाना उत्पादन के क्षेत्र में पूरी दुनिया में बिहार का वर्चस्व कायम है।
​85% वैश्विक हिस्सेदारी: दुनिया भर में खपत होने वाले कुल मखाने का लगभग 80 से 85 प्रतिशत उत्पादन अकेले बिहार में होता है।
​35,000 हेक्टेयर में फैलाव: पूर्णिया, कटिहार, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज समेत राज्य के लगभग 10-12 जिलों में 35,000 हेक्टेयर से अधिक जलक्षेत्र में इसकी खेती होती है।
​180 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात: हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत से अमेरिका, कनाडा, खाड़ी देशों और यूरोपीय संघ सहित 20 से अधिक देशों में $2.2 करोड़ (लगभग 180 करोड़ रुपये) से अधिक मूल्य का 7,000 मीट्रिक टन मखाना निर्यात किया जा चुका है।
​पश्चिम में क्यों बढ़ी 'सुपरफूड' मखाने की मांग?
​प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर मखाना अब केवल भारतीय व्रत-त्योहारों या पारंपरिक स्नैक तक सीमित नहीं रहा है। यूरोप और अमेरिका में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ता इसे 'लो-कैलोरी हेल्दी सुपरफूड' और 'ग्लूटेन-फ्री स्नैक' के रूप में अपना रहे हैं।
​'मिथिला मखाना' को मिले जीआई टैग (GI Tag) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी प्रामाणिकता को और बढ़ा दिया है। APEDA के अधिकारियों के मुताबिक, ग्रीस के बाद अब जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और जापान जैसे देशों में भी बिहार के मखाने की सीधी आपूर्ति बढ़ाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है।