बायसी में अफसरों की शह पर उगाही का 'सिंडिकेट': शिक्षा विभाग में नियमों की धज्जियां, जिम्मेदार कौन

शिक्षा विभाग में वेतन भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी और नियमानुकूल रहे, इसके लिए सरकार ने हर प्रखंड में अधिकृत 'लेखापाल' (Accountant) का पद सृजित किया है। परंतु, पूर्णिया जिले के बायसी प्रखंड में नियम-कायदों को पूरी तरह ताक पर रखकर इस संवेदनशील काम से लेखापाल की छुट्टी कर दी गई है।

बायसी में अफसरों की शह पर उगाही का 'सिंडिकेट': शिक्षा विभाग में नियमों की धज्जियां, जिम्मेदार कौन

विशेष रिपोर्ट, पूर्णिया
शिक्षा विभाग में वेतन भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी और नियमानुकूल रहे, इसके लिए सरकार ने हर प्रखंड में अधिकृत 'लेखापाल' (Accountant) का पद सृजित किया है। परंतु, पूर्णिया जिले के बायसी प्रखंड में नियम-कायदों को पूरी तरह ताक पर रखकर इस संवेदनशील काम से लेखापाल की छुट्टी कर दी गई है। सरकारी व्यवस्था में सेंधमारी करते हुए यह जिम्मेदारी एक फर्जी BRP (प्रखंड साधन सेवी) के हाथों में सौंप दी गई है।  बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोप गुट) द्वारा जिलाधिकारी को सौंपे गए साक्ष्यों के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े और पद के दुरुपयोग के पीछे एक ही मुख्य मंशा है—शिक्षकों से अवैध धन उगाही और संगठित कमीशनखोरी। 
लेखापाल को दरकिनार करने के पीछे की असली 'मंशा'
सरकारी लेखापाल केवल नियम और अभिलेखों के आधार पर ही वेतन विपत्र (Salary Bill) तैयार करता है, जहाँ अवैध उगाही की गुंजाइश बेहद कम होती है। इसके विपरीत, फर्जी BRP को इस काम में लगाकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) और फर्जी BRP की जोड़ी ने अवैध कमाई का एक नया जरिया खड़ा कर लिया है।
नाजायज धन उगाही और आर्थिक दोहन
BEO कार्यालय द्वारा अधिकृत लेखापाल की बजाय फर्जी BRP से वेतन विपत्र इसलिए बनवाया जा रहा है ताकि शिक्षकों पर सीधा दबाव बनाकर उनसे अनुचित राशि ऐंठी जा सके। जो शिक्षक 'चढ़ावा' या नजराना नहीं देते, उनका वेतन अटकाने या काटने की धमकी दी जाती है। 
फर्जी उपस्थिति और अनधिकृत वेतनों को पास कराना: कागजों में अनियमितता करने के लिए ही इस तंत्र को बनाया गया है। जैसे कि मध्य विद्यालय आसजा जनता के शिक्षक मो० शमशाद आलम का मामला, जिनकी अनुपस्थिति के बावजूद फर्जी BRP और BEO की 'सांठ-गांठ' से नियमित वेतन पास किया जा रहा है। एक ईमानदार लेखापाल ऐसे फर्जी भुगतान पर आपत्ति दर्ज करा सकता था, इसीलिए उसे इस प्रक्रिया से दूर रखा गया। 
दहशत का माहौल बनाकर 'कमाऊ दलाल' की भूमिका
शिकायत पत्र के मुताबिक, BEO के संरक्षण में फर्जी BRP एक 'कमाऊ दलाल' की तरह कार्य कर रहा है। अधिकारियों की धौंस दिखाकर शिक्षकों के बीच खौफ का माहौल तैयार किया जाता है ताकि वे आर्थिक शोषण के खिलाफ आवाज न उठा सकें। 
BEO और BRP का अटूट 'नापाक गठजोड़'
यह पूरा मामला सिर्फ नियम उल्लंघन का नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों और फर्जी BRP के बीच गहराई तक फैले भ्रष्टाचार के गठजोड़ का स्पष्ट प्रमाण है। पिछले 8-9 वर्षों से एक साधारण पंचायत शिक्षक को नियमों को दरकिनार कर BRC में बनाए रखना, BEO का छुट्टी पर जाते समय मूल BRP के स्थान पर इसी फर्जी BRP को प्रभार सौंपना (पत्रांक 448, दिनांक 03.10.2019) और 23 शिक्षकों के प्रतिनियोजन रद्द (पत्रांक 359, दिनांक 06.08.2019) होने के बावजूद चुनिंदा शिक्षकों को अवैध रूप से बनाए रखना यह सिद्ध करता है कि बायसी में शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से व्यक्तिगत कमाई का साधन बना लिया गया है। 
कहते हैं अधिकारी
"इस पूरे मामले पर जब बायसी  जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उन्होंने कोई जबावदेही नहीं समझी और एक सप्ताह के भीतर कोई जवाबदेही की जिम्मेदारी नहीं समझी। उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब भी नहीं समझा। जब इस बाबत बायसी के डीसीओ सह सीईओ अमरजीत कुमार से बात की तो उन्होंने बताया कि हमारे कार्यालय में एक भी प्रतिनियोजित शिक्षक नहीं है।
शिक्षक व शिक्षकों का पक्ष
कर्मचारी महासंघ ने मांग की है कि इस भ्रष्ट गठजोड़ की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि शिक्षकों का आर्थिक शोषण बंद हो सके। आरोपों व बयानों के बीच भारी भ्रष्टाचार की बू आने का संकेत है।इस मामले में निष्पक्ष जांच हो।