गठबंधन का गदर या क्रेडिट का क्लेश: पूर्णिया में जनता दरबार बना 'रणक्षेत्र', विधायक और मेयर समर्थकों में खूनी तनातनी!

बिहार सरकार की 'ऑन-स्पॉट समाधान' की मंशा पर पूर्णिया में उस वक्त पानी फिर गया, जब जनता की समस्याओं को हल करने लगा 'सहयोग शिविर' (जनता दरबार) नेताओं की आपसी सिरफुटव्वल का अखाड़ा बन गया।

गठबंधन का गदर या क्रेडिट का क्लेश: पूर्णिया में जनता दरबार बना 'रणक्षेत्र', विधायक और मेयर समर्थकों में खूनी तनातनी!

पूर्णिया: बिहार सरकार की 'ऑन-स्पॉट सॉल्यूशन' की व्यवस्था पर पूर्णिया में उस वक्त पानी फिर गया, जब जनता की एकता को हल करने के लिए 'सहयोग शिविर' (जनता दरबार) के नेताओं के संतगांठ सिरफुटव्वाल का एरिना बन गया। शहर में विकास कार्य का 'क्रेडिट' लेने और राजनीतिक विभाज्य समूह बनाने की होड़ में सदर नेता विजय खेमका और मेयर विभा कुमारी के बीच स्टॉर्मी तूफ़ान, विदरूपता और विदरूप सहयोगियों के बीच साझेदारी हुई।
विकास का श्रेय या घेराबंदी?
प्रत्यक्षदर्शियों के, अलग-अलग स्थानों के स्टॉलों पर अपने-अपने स्मारकों का करवा ही रहे थे कि 'मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना' को लेकर विवाद का विषय सामने आया है। एक वार्ड वार्ड प्रतिनिधि ने सीधे सदर नेता विजय खेमका से टिकट प्रश्न-उत्तर प्रारंभ कर दिया है। सवाल-जवाब में मेयर खेमे और स्थानीय कलाकारों का भी खुलासा हुआ। देखते ही देखते पूरा कैंप स्थल 'हाई-वोल्टेज ड्रामा' का केंद्र बन गया।
पुरानी आदतें, नये बदलाव!
पूर्णिया में विधायक विजय खेमका और मेयर विभा कुमारी के बीच 'क्रेडिट पॉलिटिक्स' का यह कोई नया मामला नहीं है:
मेयर गुट का आरोप: मेयर विभा कुमारी ने पहले भी आरोप लगाया था कि विधायक नगर निगम के सदस्य का श्रेय लिया जाता है और सरकारी आयोजनों के बैनर-पोस्टर से मेयर और समर्थक का नाम गायब कर उनकी अनदेखी की जाती है।
गुट का पलटवार: नेता गुट का तर्क है कि विरोधी पक्ष सरकारी शिविरों में मस्जिदों में है ताकि क्षेत्र के विकास के लिए मस्जिद को खरीदा जा सके।
जनता बेहाल, अधिकारी लाचार
नेताओं की इस उठापटक से कैंप में आये आम जनता में भारी रोष है। स्थानीय निवासी नीशू कुमार का कहना है, "सरकारी जनता को तो राहत है, लेकिन नेताओं को सिर्फ राजनीति चमकाने का मतलब है।" कंपनी के सरकारी अधिकारियों के साथ हाथ-पैर जोड़ा गया और जनसमस्याओं की चोट का मुख्य उद्देश्य पूरी तरह से टूटना हो गया।