कम पानी में बंपर पैदावार: सुखाड़ प्रभावित किसानों के लिए 'वरदान' बनी बिहार की 'सबौर श्री' धान
बिहार में हर साल किसानों को कभी सूखे तो कभी कम बारिश की मार झेलनी पड़ती है। ऐसे में पारंपरिक धान की फसलें पानी की कमी के कारण दम तोड़ देती हैं। लेकिन बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर,भागलपुर के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई 'सबौर श्री' (Sabour Shree) धान की किस्म आज सूबे के सुखाड़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए एक सच्ची जीवनदायिनी साबित हो रही है।
-पंकज झा की रिपोर्ट
पूर्णिया: बिहार में हर साल किसानों को कभी सूखे तो कभी कम बारिश की मार झेलनी पड़ती है। ऐसे में पारंपरिक धान की फसलें पानी की कमी के कारण दम तोड़ देती हैं। लेकिन बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर,भागलपुर के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई 'सबौर श्री' (Sabour Shree) धान की किस्म आज सूबे के सुखाड़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए एक सच्ची जीवनदायिनी साबित हो रही है। कम लागत और सीमित सिंचाई में भी यह किस्म किसानों की जेब भरने का काम कर रही है।
कैसे तैयार हुई यह अनोखी किस्म?
सबौर श्री कोई साधारण धान नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों ने हरियाणा बासमती और देश की लोकप्रिय मंसूरी (Mahsuri) धान के बीच क्रॉस ब्रीडिंग कराकर इसे तैयार किया है। मंसूरी धान की बेहतरीन पैदावार और बासमती के बेहतरीन दाने के गुणों का यह एक अनूठा संगम है।
'सबौर श्री' की 5 बड़ी विशेषताएँ जो इसे बनाती हैं खास
इस किस्म को विकसित ही इस तरह किया गया है कि यदि मॉनसून में देरी हो या बारिश कम हो, तब भी फसल खराब नहीं होती। यह सूखे को सहने की अद्भुत क्षमता रखती है।0जहाँ पारंपरिक धान की फसलें 150 से अधिक दिन लेती हैं, वहीं सबौर श्री मात्र 135 से 140 दिनों में पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसका दाना लंबा और महीन होता है। पकने के बाद यह चावल खाने में बेहद स्वादिष्ट और सुपाच्य होता है, जिससे बाजार में व्यापारियों के बीच इसकी मांग बहुत अधिक रहती है। पुरानी और पारंपरिक किस्मों (जैसे सीता धान) में रोग लगने का खतरा ज्यादा होता है। इसके विपरीत, सबौर श्री में बीमारियों और कीटों के प्रति अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता पाई जाती है।यह फसल कम पानी और सामान्य देखरेख के बावजूद यह किस्म 55 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की बंपर उपज देने में पूरी तरह सक्षम है।
सरकारी अनुदान और होम डिलीवरी की सुविधा
बिहार सरकार के कृषि विभाग और बिहार राज्य बीज निगम (BRBN) द्वारा खरीफ मौसम में इस बीज को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। किसानों को इस प्रमाणित बीज पर विशेष किसानों के लिए नि:शुल्क और सामान्य किसानों के लिए 50% से लेकर 90% तक का भारी अनुदान (subsidy) दिया जाता है। इतना ही नहीं, किसान डीबीटी (DBT Agriculture) पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करके मात्र ₹5 प्रति किलोग्राम के अतिरिक्त शुल्क पर इसकी होम डिलीवरी भी पा सकते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, जून के महीने में इसकी नर्सरी (बिचड़ा) डालना सबसे उपयुक्त माना जाता है। सही समय पर रोपाई करने से पौधे को मजबूत होने का समय मिलता है और कम सिंचाई में भी पैदावार चरम पर पहुँचती है। यदि आपके क्षेत्र में पानी का संकट रहता है, तो 'सबौर श्री' आपके खेतों में खुशहाली लाने का सबसे सटीक जरिया है।