क्रूरता की सारी हदें पार: जहां गूंजनी थी किलकारियां, वहां मिला मासूम का क्षत-विक्षत शव; रूह कंपा देगी भागलपुर की यह वारदात
बिहार के भागलपुर में प्रतिशोध की रूह कंपा देने वाली वारदात। नाथनगर के लालूचक में दुश्मनों ने ढाई साल के मासूम आदित्य का अपहरण कर बर्बरता से हत्या कर दी। छठी की खुशियां मातम में बदलीं। पुलिस वैज्ञानिक जांच में जुटी। पूरी खबर पढ़ें।
राक्षस की सारी हदें पार: जहां गूंजनी थी किलकारियां, वहां मिला मासूम का क्षत-विक्षत शव; बिहार के भागलपुर जिले से एक ऐसी रूह कंपा
देने वाली घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। नाथनगर थाना क्षेत्र के विलेचक इलाके में प्रतिशोध की अंधी आग में जल रहे दुश्मनों ने एक मासूम, बेकसूर के एक साल के बच्चे को अपने हैवानियत का शिकार बना लिया। जिस घर में कुछ घंटे पहले नई जिंदगी के आगमन की सहना समीक्षाएं चल रही थीं, वहां अब सिर्फ चीख-पुकार मची है और मां का प्यासा पसरा है।
खुशियों के बाग में पल भर में पसरा मातम
मंगलवार के दिन पीड़ित पिता पांचू मंडल के परिवार के लिए बेहद दुखी था। घर में तीसरे बच्चे के जन्म की खुशी में 'छठी' का मांगलिक कार्यक्रम चल रहा था। रिश्तेदारों और रिश्तेदारों की हलचल-पहल थी। रात ढलने पर घर में जगह की कमी के कारण पांचू मंडल अपने पांच साल के मझले बेटे आदित्य को लेकर पास के महावीर मंदिर परिसर में सोना चला गया। उन्हें यह भी पता नहीं था कि इस रात उनके मासूम बच्चे की आखिरी रात साबित होगी।
बिग बॉस 12 बजे, जब पिता गहरी नींद में थे, उसी स्थान पर बैठे बेरहम हत्यारों ने स्टील से पिता की बारात के पास सो रहे मासूम आदित्य का अपहरण कर लिया। सुबह चार बजे जब पिता की आंख खुली तो बगल की आंख खुली तो उनके पैर जमीन से खिसक गए। हर तरफ छापे चले गए, लेकिन मासूम का कहीं पता नहीं चला। वास्तविकता-बिलखते नमूने ने तुरंत नाथनगर स्टेशन में बच्चे की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज की।
नदी की लहरों में तैरता मिला हैवानियत का सच
बुधवार की सुबह करीब पांच बजे जब बच्चे के चाचा श्रीरामपुर घाट की तरफ गए तो वहां का मंज़र उनके कालेजा मुंह देखकर निकल गया। गंगा की शांत लहरों में एक किशोर बच्चे का शव तैर रहा था। जब स्थानीय लोगों की मदद से शव बाहर निकला तो उसकी पहचान लापता आदित्य के रूप में हुई।
बदमाश ने मासूम की जान लेने में नैतिकता की सारी हदें पार कर दी थी। मासूम के सिर पर गहरी चोट थी और लोहे की कील ठोक दी गई थी। उसकी दाहिनी आंख के पास बरीता से वार करने के निशान थे। विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की प्रारंभिक जांच के अनुसार, बच्चे की जीभ बाहर निकली थी। खतरे की बात यह है कि स्मारक पर कील ठोकने के बाद उसका ग्लास घोंटा गया और स्मारक के लिए शव को नदी में फेंक दिया गया।
प्रतिशोध की आग में बुझ गया घर का चिराग
इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड के पीछे पिशाच और पारिवारिक दुश्मनी की बात सामने आ रही है। पीड़ित पिता पांचू मंडल ने अपने गोतिया (पड़ोसी रिश्तेदार) पर हत्या का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने पुलिस को निरीक्षण में बताया कि उनके बीच पुराना विवाद चल रहा है। यहां तक कि छठी के मांगलिक कार्यक्रम के दौरान भी उन्हें सांत्वना देने वालों की धमकियां दी गईं। "मेरा बच्चा सो रहा था... वह किसी का क्या बना था? शत्रु मेरी थी, तो सजा मेरे मासूम बच्चे को क्यों दी?"
पुलिस की कार्रवाई में अधिकारी की उम्मीद
घटना के उद्घाटन को देखते हुए नाथनगर पुलिस, एफएसएल और डॉग स्क्वायड की घटना की तुरंत पुष्टि हो गई। नगर निगम-2 राकेश कुमार ने मामले के खुलासे को स्पष्ट करते हुए बताया कि पहले दर्ज किए गए घोटाले की संगीन धारा को अब हत्याकांड में बदल दिया गया है।
शव को परीक्षण के लिए भेज दिया गया है और उसकी सूची में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक वैज्ञानिक शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि सबूतों के आधार पर जांच रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर जल्द ही पहचान कर ली जाएगी और इस अपराध को अंजाम देने वाले दरिंदों को पीछे से भेजा जाएगा। लेकिन कानून की सज़ा बर्बाद जो भी हो, वो अभागे परिवार की सूनी गोद और मासूम आदित्य की पीड़ा को कभी भुलाया नहीं जा सकता।