वेदर इमरजेंसी: जब शरीर बन जाए भट्टी, तो लू और डिहाइड्रेशन को कैसे दें मात? जानें 5 तरीके
भारत के कई हिस्सों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, और बाहर निकलते ही गरम हवा के थपेड़े (लू) शरीर को झुलसा रहे हैं। आलम यह है कि अस्पतालों में डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक (लू लगना) के मरीजों की कतारें लगी हैं। इस भीषण गर्मी में जरा सी लापरवाही जान...
वेदर इमरजेंसी: जब शरीर बन जाए भट्टी, तो लू और डिहाइड्रेशन को कैसे दें मात? जानें 5 तरीके जून के इस महीने में सूरज की तपिश आसमान से आग बरसा रही है। भारत के कई हिस्सों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, और बाहर निकलते ही गरम हवा के थपेड़े (लू) शरीर को झुलसा रहे हैं। आलम यह है कि अस्पतालों में डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक (लू लगना) के मरीजों की कतारें लगी हैं। इस भीषण गर्मी में जरा सी लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है।खुद को और अपने परिवार को इस 'वेदर इमरजेंसी' से सुरक्षित रखने के लिए, आइए जानते हैं हीट स्ट्रोक के गंभीर लक्षण और इससे बचने के 5 अचूक और आसान उपाय।
जब शरीर बन जाता है भट्टी
लू लगना सिर्फ मामूली थकावट नहीं है, यह एक मेडिकल इमरजेंसी है। जब शरीर का तापमान अचानक बढ़ने लगता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। लू लगने से हमारे दिमाग, किडनी और दिल की कार्यक्षमता पर बहुत बुरा असर पड़ता है। कई बार सिर में खून अत्यधिक गर्म हो जाने से व्यक्ति की जान तक चली जाती है। सिर में तेज दर्द होना, नाड़ी (पल्स) या सांस की गति का अचानक तेज हो जाना, और शरीर में जकड़न महसूस होना। त्वचा का रूखा, गर्म या नम होना, और शरीर पर लाल-लाल दाने (घमौरियां) निकल आना। लू के कारण पाचन तंत्र बिगड़ जाता है, जिससे डायरिया (दस्त), पेचिश और लगातार उल्टियां होने की संभावना बढ़ जाती है। घबराहट और बेहोशी: चक्कर आना, जी-मिचलाना, बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक पसीना आना और गंभीर स्थिति में इंसान बेहोश भी हो सकता है।
गर्मी को दें मात: हीट स्ट्रोक से बचने के 5 अचूक तरीके
इस जानलेवा गर्मी के बीच खुद को कूल और सुरक्षित रखने के लिए अपनी दिनचर्या में इन 5 आदतों को तुरंत शामिल करें।
खुद को रखें 'सुपर हाइड्रेटेड'
गर्मी से लड़ने का सबसे पहला नियम है—शरीर में पानी की कमी न होने देना।दिनभर खूब पानी पिएं। अपने साथ हमेशा ORS या ग्लूकोज मिला पानी रखें।प्रकृति के वरदान जैसे नींबू पानी, नारियल पानी, बेल का शरबत, खस का शरबत, आम पन्ना और छाछ का सेवन नियमित रूप से करें। ये आपके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखते हैं।
पिक ऑवर्स' में धूप को कहें 'नो'
दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच जब धूप सबसे तीखी होती है, तब बाहर निकलने से बचें। अगर बाहर जाना बेहद जरूरी हो, तो सिर पर मोटा सूती कपड़ा बांधें, या टोपी, स्कार्फ और छाते का इस्तेमाल करें। आंखों की सुरक्षा के लिए सनग्लासेज (धूप का चश्मा) पहनें। हमेशा ढीले और हल्के रंग के सूती (कॉटन) कपड़े पहनें ताकि शरीर को हवा मिलती रहे। घर से निकलने से 20 मिनट पहले कम से कम SPF 30 वाली सनस्क्रीन जरूर लगाएं, ताकि त्वचा हानिकारक UV किरणों और टैनिंग से बची रहे। घर से निकलते समय अपनी जेब में एक छोटा प्याज जरूर रखें, यह लू को सोखने का काम करता है।
भारी और मसालेदार भोजन से तौबा
गर्मियों में हमारा पाचन तंत्र थोड़ा धीमा हो जाता है, इसलिए खान-पान का खास ख्याल रखें।तली-भुनी, ऑयली और ज्यादा मसालेदार चीजों से दूर रहें, क्योंकि ये शरीर में अंदरूनी गर्मी बढ़ाती हैं। हल्का और सुपाच्य भोजन करें। अपनी थाली में ककड़ी, कच्चा प्याज, छाछ और दही की मात्रा बढ़ा दें। तरबूज, खरबूजा, खीरा और संतरा जैसे पानी से भरपूर ताजे फलों का आनंद लें।
प्याज का 'जादुई' प्रयोग
कच्चा प्याज लू से बचाने में किसी अचूक दवा से कम नहीं है। अपने दोपहर के भोजन में कच्चे प्याज को सलाद के रूप में जरूर शामिल करें।यदि आप धूप से आए हैं और अस्वस्थ महसूस कर रहे हैं, तो एक प्याज को काटकर उसके रस को पैरों के तलवों पर और कान के पीछे रगड़ें। यह शरीर की गर्मी को तेजी से खींचता है।
बर्फ और ठंडी पट्टियों का सहारा लें
जब बाहर से आने पर शरीर का तापमान सातवें आसमान पर हो, तो उसे तुरंत सामान्य करना जरूरी है।बाहर से आते ही एक गीला रुमाल अपनी गर्दन या माथे पर रखें, इससे शरीर को तुरंत ठंडक मिलेगी।ज्यादा गर्मी लगने पर बर्फ की पट्टियों को गर्दन, अंडरआर्म्स, हाथ और पैरों पर लगाएं। यह थेरेपी शरीर के बढ़े हुए तापमान (बॉडी टेम्परेचर) को बहुत तेजी से नीचे लाती है।