‘सत्य स्तंभ’ की खोजी पत्रकारिता रंग लाई: बायसी शिक्षा विभाग में हड़कंप, 20 साल से BRC में जमे शिक्षक हटाए गए,सवाल वही 'आका' कौन?

पूर्वोत्तर बिहार के लोकप्रिय न्यूज पोर्टल "सत्य स्तंभ" द्वारा बायसी शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम का बड़ा असर देखने को मिला है। लगातार प्रकाशित हो रही खबरों और खुलती पोल के दबाव में आकर आखिरकार शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों को कड़ा कदम उठाना ही पड़ा। बीआरसी (BRC) में पिछले 20 वर्षों से अंगद की तरह पैर जमाए शिक्षक नैयर आलम को तत्काल प्रभाव से हटाकर उनके मूल विद्यालय भेज दिया गया है।

‘सत्य स्तंभ’ की खोजी पत्रकारिता रंग लाई: बायसी शिक्षा विभाग में हड़कंप, 20 साल से BRC में जमे शिक्षक हटाए गए,सवाल वही 'आका' कौन?

खबर का असर 

बायसी (पूर्णिया): बिहार के लोकप्रिय न्यूज पोर्टल "सत्य स्तंभ" के खिलाफ बायसी शिक्षा विभाग में व्याप्त व्यंग्य का बड़ा असर देखने को मिल रहा है। लगातार प्रकाशित हो रही खबरों और खुली पोल के दबाव में अंतिम शिक्षा विभाग के पेशेवरों को कड़े कदम उठाए गए। बीआरसी (बीआरसी) में पिछले 20 वर्षों से अंगद की तरह पैर जमाए शिक्षक नैयर आलम को एस्ट्रिक्ट इम्पैक्ट से उनके मूल विद्यालय भेजा गया है।
"सत्य स्तम्भ " की इस खोजी मठ के बाद दस्तावेजों का अध्ययन किया गया। आम जनता और संकाय के बीच इस कार्रवाई से राहत की सांस तो ली जा रही है, लेकिन इस पूरी कार्रवाई ने विभाग की कार्यशैली पर कई गंभीर और अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं।
मुख्य प्रश्न जो अब भी सावधान हैं?
इस खबर की पुष्टि करते हुए मध्य विद्यालय मालोपाड़ा तेलंगा के शिक्षक नायर आलम ने बताया कि बीआरसी के सहायक शिक्षक नायर आलम ने अपने मूल विद्यालय में योगदान दिया है। 20 साल की मेहरबानी क्यों? आखिर किस नियम और नीति के तहत एक शिक्षक को दो दशक तक बीआरसी में प्रतिनियुक्त किया गया?
असली 'मास्टरमाइंड' कौन?
नैयर बड़े आलम तो एक मोहरा थे, लेकिन सवाल यह है कि प्रतिनियोजन और पिरामिड के इस खेल का असली सूत्रधार या उर्फ ​​कौन है? पूर्वजों के संस्थापकों की धज्जियाँ उड़ रही थीं? आर्थिक इंजीनियरों का खाता कब? वर्षों से चले आ रहे हैं इस सिंडिकेट के माध्यम से, वित्तीय और सहायक कर्मचारियों की जांच कब होगी?
सत्य स्तंभ से जुड़े
लोगों का कहना है कि सिर्फ एक मोहरे को हटाने से शिक्षा विभाग का ढांचा खत्म नहीं होगा। जब तक इस पूरे खेल के पीछे साइंटिस्ट बड़े पैमाने पर अधूरे और फिलीपैंट पर गाज नहीं गिरती, तब तक न्याय है। "सत्य स्तंभ" इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजरें बनाए रखी है और हर एक परत को बेनकाब करने की अपनी दोस्ती जारी रखी है।