महाघोटाला खुलासा: शिक्षा विभाग में 'फर्जीवाड़े' का खेल! बिना स्कूल गए बंट रहा वेतन, चहेतों को मलाईदार कुर्सियां और मनमानी का पर्दाफाश!
बिहार के शिक्षा महकमे में अनियमितताओं और धांधली का एक बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए विभागीय सांठगांठ से न केवल फर्जी प्रतिनियुक्तियों (Deputation) का खेल खेला जा रहा है, बल्कि बिना स्कूल में ड्यूटी दिए शिक्षकों को धड़ल्ले से सरकारी खजाने से वेतन का भुगतान भी किया जा रहा है।
पूर्णियाँ/बायसी: बिहार के शिक्षा महकमे में अनियमितताओं और धांधली का एक बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए विभागीय सांठगांठ से न केवल फर्जी प्रतिनियुक्तियों (Deputation) का खेल खेला जा रहा है, बल्कि बिना स्कूल में ड्यूटी दिए शिक्षकों को धड़ल्ले से सरकारी खजाने से वेतन का भुगतान भी किया जा रहा है। दस्तावेज़ों और RTI (सूचना का अधिकार) से मिले सबूतों ने अधिकारियों और रसूखदार शिक्षकों की मिलीभगत की पोल खोलकर रख दी है।
बिना हाजिरी के 'वेतन की बरसात' – न इस स्कूल में, न उस स्कूल में!
सर्व शिक्षा अभियान (बिहार शिक्षा परियोजना परिषद, पूर्णियाँ) के पत्र संख्या MGT/1821 (दिनांक 30/11/2019) के अनुसार, मो० नैयर आलम (पंचायत शिक्षक एवं बीआरपी) और शहजाद आलम (प्रखंड शिक्षक, म०वि० आसजा जनता) के खिलाफ गंभीर मामले उजागर हुए हैं।
चौंकाने वाला तथ्य: शहजाद आलम का प्रतिनियोजन प्रा०वि० अर्राबाड़ी में किया गया था। लेकिन जब दोनों स्कूलों की शिक्षक उपस्थिति पंजी (Attendance Register) की जांच की गई, तो पता चला कि शहजाद आलम किसी भी स्कूल में उपस्थित ही नहीं थे!
बड़ा सवाल: जब शिक्षक दोनों में से किसी स्कूल में उपस्थित ही नहीं था, तो फिर किस आधार पर उसकी अनुपस्थिति विवरणी बनी और उसे सरकारी खजाने से वेतन बांट दिया गया?
लेखापाल को साइडकर फर्जी BRP बना 'वेतन बनाने वाला मास्टर'
नियमों के मुताबिक ब्लॉक के शिक्षकों का मासिक वेतन विपत्र (Salary Bill) तैयार करने का काम पदस्थापित सहायक लेखापाल (प्रशांत कुमार दास) का था। लेकिन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO), बायसी ने सांठगांठ करके लेखापाल को दरकिनार कर दिया और फर्जी तरीके से BRP बने मो० नैयर आलम को वेतन विपत्र तैयार करने के लिए अधिकृत कर दिया। आरोप है कि शिक्षकों से नाजायज वसूली (उगाही) करने के इरादे से यह पूरी सेटिंग की गई थी
नियम ताक पर: नियमित शिक्षकों को दरकिनार कर पसंदीदा को बनाया प्रभारी एचएम (Headmaster)
पत्रों में खुलासा हुआ है कि बायसी प्रखंड में कई ऐसे विद्यालय हैं जहां नियमित वेतनमान वाले शिक्षक मौजूद हैं, फिर भी विभागीय नियमों को ताक पर रखकर नियोजित शिक्षकों को स्कूल का प्रभारी प्रधानाध्यापक (HM) बना दिया गया है।
मामला 1: म०वि० डंगराह पूरबपार में नियमित शिक्षक मौजूद होने के बावजूद, फर्जी प्रतिनियोजन के सहारे मो० शाहनवाज आलम ने अपनी पत्नी शकीला खातून को प्रभारी बना दिया और खुद म०वि० चन्द्रगाँव में जमे रहे।
मामला 2: म०वि० वजीरडीह की श्रीमती सुजाता कुमारी का प्रतिनियोजन प्राथमिक विद्यालय रहिका टोल में था। मूल शिक्षक रहने के बावजूद उन्हें प्रभारी बना दिया गया। ताज्जुब की बात यह है कि प्रखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रतिनियोजन रद्द किए जाने (पत्रांक 359, दिनांक 06.08.2019) के बाद भी वह अवैध रूप से प्रभारी बनी रहीं!
राज्य सरकार के आदेश की सीधी अवहेलना
राज्य परियोजना निदेशक, पटना के स्पष्ट पत्रांक 5498 (दिनांक 18.09.2018) में निर्देश दिया गया था कि नव-चयनित BRPs को छोड़कर किसी अन्य शिक्षक का अवैध प्रतिनियोजन या साधनसेवी (Resource Person) के रूप में कार्य नहीं लिया जाएगा।
इसके बावजूद पूर्णियाँ के जिला शिक्षा कार्यालय और बायसी प्रखंड में 23 से अधिक शिक्षकों की अवैध प्रतिनियुक्ति का खेल चलता रहा। सिविल कोर्ट पूर्णियाँ के अधिवक्ता हेमंत कुमार द्वारा RTI (प्रपत्र 'क') के तहत मांगी गई सूचनाओं ने इस पूरे रैकेट की परतें उधेड़ दी हैं।
विभाग का रुख: 3 दिन में मांगा था जवाब
मामले की गंभीरता और संघ/समिति की जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान, पूर्णियाँ) ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बायसी) और मो० नैयर आलम को कड़ा स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया था। उनसे पूछा गया है कि इस वित्तीय अनियमितता और धांधली के लिए क्यों न उनके विरुद्ध सख्त विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाए!
इस बाबत शिक्षा विभाग का पक्ष जानने लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी से कई बार मोबाइल से संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।
संपादकीय टिप्पणी: क्या शिक्षा विभाग के बड़े हुक्मरान इस लूट और फर्जीवाड़े के सिंडिकेट पर कोई ठोस कार्रवाई करेंगे या फिर जांच और स्पष्टीकरण के कागजी घोड़ों के बीच यह फाइल भी दबा दी जाएगी?