पूर्णिया: खरीफ सीजन आते ही बायसी के पैक्सों में शुरू हुआ खेल, खाद के लिए भटक रहे किसान, सहकारिता विभाग सुस्त

सीमांचल और बाढ़ प्रभावित बायसी अनुमंडल क्षेत्र में धान की रोपाई का काम जोर पकड़ चुका है। किसानों को इस वक्त यूरिया और डीएपी खाद की सख्त जरूरत है, लेकिन बायसी अनुमंडल के विभिन्न पैक्सों (प्राथमिक कृषि साख समितियों) का पुराना रवैया एक बार फिर किसानों पर भारी पड़ रहा है।

पूर्णिया: खरीफ सीजन आते ही बायसी के पैक्सों में शुरू हुआ खेल, खाद के लिए भटक रहे किसान, सहकारिता विभाग सुस्त

ग्राउंड रिपोर्ट | बायसी (पूर्णिया)
पूर्णिया। मानसून की दस्तक के साथ ही सीमांचल और बाढ़ प्रभावित बायसी अनुमंडल क्षेत्र में धान की रोपाई का काम जोर पकड़ चुका है। किसानों को इस वक्त यूरिया और डीएपी खाद की सख्त जरूरत है, लेकिन बायसी अनुमंडल के विभिन्न पैक्सों (प्राथमिक कृषि साख समितियों) का पुराना रवैया एक बार फिर किसानों पर भारी पड़ रहा है। कागजों पर किसानों के कल्याण का दावा करने वाला सहकारिता विभाग धरातल पर पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रहा है। खाद-बीज की कालाबाजारी से लेकर प्रबंधकीय तानाशाही के कारण बायसी के आम किसान इस पीक सीजन में दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
रोपाई का सीजन चरम पर, गोदामों पर लटके ताले
धान की रोपाई के शुरुआती दिनों में पौधों की ग्रोथ के लिए यूरिया और डीएपी खाद की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। लेकिन बायसी प्रखंड के ज्यादातर पैक्स गोदामों में या तो ताले लटके हैं या फिर किसानों को 'स्टॉक खत्म' का रटा-रटाया जवाब दिया जा रहा है।
पीड़ित किसान का बयान: "पैक्सों को सरकारी दर पर खाद बेचने के लिए भेजा जाता है, लेकिन वहां खाद मिलती ही नहीं। मजबूरन हमें खुले बाजार से 266 रुपये की यूरिया की बोरी 350 से 400 रुपये में और डीएपी ऊंचे दामों पर खरीदनी पड़ रही है। पैक्स अध्यक्ष और प्रबंधक अपनी जेबें भर रहे हैं और हम कर्ज में डूब रहे हैं।"
कालाबाजारी का खेल
सरकारी खाद आढ़तियों की दुकानों पर
स्थानीय किसानों और प्रतिनिधियों का गंभीर आरोप है कि पैक्सों को आवंटित होने वाला सरकारी खाद और उन्नत किस्म का बीज आम सदस्य-किसानों तक पहुंचता ही नहीं है। पैक्स प्रबंधन रात के अंधेरे में सरकारी खाद की खेप निजी दुकानदारों और बिचौलियों को ऊंचे दामों पर बेच देता है। बाद में वही खाद किसानों को खुले बाजार में महंगे दामों पर खरीदनी पड़ती है।
हर सीजन का यही हाल
धान खरीद से लेकर खाद वितरण तक धांधली बायसी के पैक्सों में अनियमितता का यह कोई नया मामला नहीं है। यह संस्था साल भर भ्रष्टाचार का गढ़ बनी रहती है।खरीफ सीजन में खाद-बीज की किल्लत पैदा कर कालाबाजारी करना।
रबी/अधिप्राप्ति सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर असली किसानों का धान न खरीदकर बिचौलियों के नाम पर  वास्तविक गरीब किसानों को नजरअंदाज कर चहेतों और फर्जी कागजातों के आधार पर कागजी लाभ पहुंचाना।
न बैठकें, न ऑडिट ,तानाशाही की भेंट चढ़ी सहकारिता
नियमों के मुताबिक पैक्सों में आमसभा और वित्तीय ऑडिट होना अनिवार्य है। लेकिन बायसी क्षेत्र में कई पैक्स अध्यक्षों ने इसे निजी संपत्ति बना लिया है। किस किसान को कितना खाद आया, इसकी कोई पारदर्शी सूची बोर्ड पर प्रदर्शित नहीं की जाती। सदस्यता सूची में भी हेरफेर कर अपनी मनपसंद टोली बनाई गई है ताकि चुनावों में अपना कब्जा बरकरार रखा जा सके।
प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी (BCO) और जिला सहकारिता पदाधिकारी (DCO) को स्थानीय किसान संगठनों द्वारा बार-बार लिखित शिकायतें दी जाती हैं, लेकिन जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। भौतिक सत्यापन (Physical Verification) केवल फाइलों में सिमट कर रह गया है।
किसानों की स्पष्ट मांगें
तत्काल संयुक्त छापेमारी: बायसी के सभी पैक्स गोदामों और उनके आवंटन रजिस्टर की प्रखंड प्रशासन द्वारा औचक जांच (Surprise Inspection) खाद-बीज का वितरण कृषि समन्वयक की मौजूदगी में ई-पॉश (e-POS) मशीन और आधार सत्यापन के जरिए सार्वजनिक रूप से कराया जाए। खाद की कालाबाजारी और वित्तीय गड़बड़ी में लिप्त पैक्स अध्यक्षों व प्रबंधकों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए।
अधिकारी बने मूकदर्शक
इस बाबत हमने तीन बार डीसीओ से प्रतिक्रिया जानने के लिए उनके सरकारी नंबर से संपर्क साधना चाहा ,लेकिन उन्होंने फोन उठाना जरुरी नहीं समझा।
हमारी जिला सहकारिता पदाधिकारी से तीन महत्वपूर्ण सवाल
खरीद और भुगतान: किसानों को फसल खरीद का भुगतान महीनों तक क्यों लटकाया जाता है और बिचौलियों पर रोक क्यों नहीं लगती?
वित्तीय धांधली: सहकारी बैंकों और समितियों में गबन, फर्जी ऋण तथा खाद-बीज की कालाबाजारी करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं होती?
क्या होगी कार्रवाई:सहकारिता विभाग के डीसीओ (जिला सहकारिता अधिकारी) और बीसीओ (ब्लॉक सहकारिता अधिकारी) निचले स्तर के कर्मचारियों, पैक्स अध्यक्षों तथा आम किसानों के साथ किए जाने वाले दुर्व्यवहार, अवैध वसूली और उत्पीड़न पर रोक लगाने के लिए विभाग क्या कार्रवाई कर रहा है?