शिक्षक ही नहीं, 'संस्कारों के ब्रांड एम्बेसडर' भी हैं: सरकारी स्कूलों में अब सिर्फ 'फॉर्मल ड्रेस', जींस-टीशर्ट पर लगा बैन
अब राज्य के सरकारी विद्यालयों में शिक्षक और शिक्षकेत्तर (नॉन-टीचिंग) कर्मचारी केवल गरिमापूर्ण औपचारिक (फॉर्मल) परिधान में ही नज़र आएंगे। ड्यूटी के दौरान जींस, टी-शर्ट या किसी भी तरह के अनौपचारिक (कैजुअल) कपड़ों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
पूर्णिया: सरकारी स्कूलों की गरिमा, अनुशासन और सकारात्मक माहौल को फिर से बहाल करने के लिए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के सरकारी विद्यालयों में शिक्षक और शिक्षकेत्तर (नॉन-टीचिंग) कर्मचारी केवल गरिमापूर्ण औपचारिक (फॉर्मल) परिधान में ही नज़र आएंगे। ड्यूटी के दौरान जींस, टी-शर्ट या किसी भी तरह के अनौपचारिक (कैजुअल) कपड़ों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।औपचारिक वेशभूषा अनिवार्य के तहत विद्यालय और कार्यालय समय में सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए फॉर्मल ड्रेस पहनना अनिवार्य होगा। स्कूल परिसर में किसी भी प्रकार की अमर्यादित या शैक्षणिक गरिमा के खिलाफ गतिविधियों पर सख्त पाबंदी रहेगी।
क्यों पड़ी इस फैसले की जरूरत?
हाल के दिनों में कुछ सरकारी विद्यालयों से शिक्षकों की लापरवाही और अनुशासनहीनता की तस्वीरें वायरल हुई थीं—कहीं शिक्षक सो रहे थे, तो कहीं उनका आचरण पद के अनुकूल नहीं था। इन घटनाओं से न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था की छवि धूमिल हुई, बल्कि बच्चों के मन में शिक्षकों के प्रति सम्मान भी कम हुआ।
"पहनावा केवल कपड़े नहीं, बल्कि आपके काम और व्यक्तित्व के प्रति आपकी गंभीरता का पहला आईना होता है।"
फैसले का स्वागत: "शिक्षक बच्चों के रोल मॉडल हैं"
सीमांचल के जिलों के लगभग 1,965 सरकारी विद्यालयों सहित पूरे राज्य में शिक्षाविदों और स्थानीय लोगों ने इस फैसले का खुलकर समर्थन किया है।प्रबुद्ध जनों का मानना है कि स्कूल सिर्फ किताबी ज्ञान का केंद्र नहीं है, यहाँ बच्चों के चरित्र का निर्माण होता है। शिक्षक बच्चों के लिए रोल मॉडल होते हैं; उनकी वेशभूषा और व्यवहार का विद्यार्थियों के मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। फॉर्मल ड्रेस से न सिर्फ कार्यक्षेत्र में अनुशासन आता है, बल्कि विद्यार्थियों और अभिभावकों का शिक्षकों के प्रति विश्वास भी मजबूत होता है।इस नई पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि सरकारी स्कूलों में एक बेहतर शैक्षणिक माहौल और मजबूत कार्य-संस्कृति की नई शुरुआत होगी।