बिहार पंचायत चुनाव 2026: सितंबर के अंत में बज सकता है चुनावी बिगुल, इस बार बैलेट पेपर पूरी तरह आउट, अब EVM से होगा महामुकाबला
बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग इस बार चुनाव को ऐतिहासिक और पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए अंतिम तैयारियों में जुट गया है।
पटना: बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग इस बार चुनाव को ऐतिहासिक और पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए अंतिम तैयारियों में जुट गया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, सूबे में चुनावी महासंग्राम सितंबर के आखिरी हफ्ते से शुरू होकर अक्टूबर के पहले हफ्ते के बीच शुरू हो सकता है। पूरे राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से मतदान संपन्न कराने के लिए इस बार 8 से 9 चरणों में वोट डाले जाएंगे। इस बार के चुनाव में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई ऐसे बड़े बदलाव होने जा रहे हैं, जो पूरे चुनावी कैलकुलेशन को बदल कर रख देंगे।
बैलेट पेपर का जमाना खत्म, अब EVM से वोटिंग
इस चुनाव का सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव यह है कि अब त्रिस्तरीय पंचायत के सभी 6 पदों के लिए मतपत्रों (बैलेट पेपर) का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इस बार शत-प्रतिशत वोटिंग इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के जरिए होगी।इससे मतदान प्रक्रिया में तेजी आएगी। मतगणना (काउंटिंग) के समय होने वाले विवादों, धांधली और गड़बड़ियों की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
नया आरक्षण रोस्टर बिगाड़ेगा दिग्गजों का खेल
पंचायतों के नए परिसीमन (सीमांकन) के बाद आयोग आरक्षण की नई सूची को अंतिम रूप दे रहा है। राज्य की 4,000 से अधिक पंचायतों और 55 हजार से ज्यादा ग्रामीण वार्डों में इस बार नया आरक्षण रोस्टर लागू होगा।
महिलाओं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) और पिछड़ा वर्ग (BC) के लिए सीटों के इस नए फेरबदल से कई मौजूदा दिग्गजों के राजनीतिक समीकरण बिगड़ने तय हैं।
2011 की जनगणना ही मुख्य आधार
आरक्षण के निर्धारण और प्रपत्र-1 को तैयार करने के लिए आयोग ने वर्ष 2011 की जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों को ही अपना मुख्य आधार बनाया है। किसी भी तरह की पक्षपात या त्रुटि की शिकायत न आए, इसके लिए जिला प्रशासन के सहयोग से बूथों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) तेजी से किया जा रहा है
दावा-आपत्ति की मियाद खत्म, अब तारीखों का इंतजार
आयोग ने पारदर्शिता बरतते हुए आरक्षण सूची पर दावा-आपत्ति दर्ज कराने की डेडलाइन को बढ़ाकर 15 जून 2026 किया था, जो अब समाप्त हो चुकी है। प्राप्त आपत्तियों के निपटारे के बाद आयोग अब किसी भी दिन फाइनल वोटर लिस्ट और चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान कर सकता है। संभावित तारीखों को देखते हुए सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों (DMs) को बूथों पर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने के निर्देश दे दिए गए हैं।