छात्रों का भविष्य दांव पर: UP B.Ed. काउंसलिंग के अंतिम दिन मची होड़, सीटें कम पड़ने पर कॉलेजों पर लगा मनमानी वसूली का आरोप
संयुक्त प्रवेश परीक्षा की काउंसलिंग प्रक्रिया आज अपने अंतिम चरण में पहुँच गई है, लेकिन काउंसलिंग समाप्त होने के साथ ही लाखों अभ्यर्थियों का B.Ed. करने का सपना अधर में लटकता नजर आ रहा है।
उत्तर प्रदेश B.Ed.: संयुक्त प्रवेश परीक्षा की काउंसलिंग प्रक्रिया आज अपने अंतिम चरण में पहुँच गई है, लेकिन काउंसलिंग समाप्त होने के साथ ही लाखों अभ्यर्थियों का B.Ed. करने का सपना अधर में लटकता नजर आ रहा है। इस वर्ष प्रवेश परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या उपलब्ध सीटों के मुकाबले कहीं अधिक थी, जिसके कारण दाखिले को लेकर अभूतपूर्व मारामारी देखने को मिली।
काउंसलिंग के अंतिम दिन भी हजारों छात्र आवंटन और दाखिले के लिए भटकते रहे। पर्याप्त सीटें न होने का सीधा फायदा कुछ निजी महाविद्यालयों ने उठाया। राज्य के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों पर यह आरोप लग रहा है कि उन्होंने खाली सीटों पर प्रवेश के नाम पर छात्रों से मनमाने तरीके से अतिरिक्त धनराशि की मांग की और आर्थिक शोषण किया।
इन प्रमुख विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों में सबसे ज्यादा परेशानी
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU, मेरठ): पश्चिमी यूपी के इस प्रमुख विश्वविद्यालय में सीटों के मुकाबले कई गुना ज्यादा दावेदार होने के कारण दाखिले के लिए सबसे ज्यादा आपाधापी रही।
छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJM, कानपुर): कानपुर और आसपास के जिलों के अभ्यर्थी अंतिम दिन तक कॉलेज आवंटन और फीस समायोजन के लिए चक्कर काटते दिखे।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (DBRAU, आगरा): यहाँ के संबद्ध कॉलेजों में डायरेक्ट एडमिशन और बची हुई सीटों पर मनमानी वसूली की सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आईं।
गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय (GJU): अन्य राज्यों और सीमावर्ती क्षेत्रों के छात्रों की भारी भीड़ के कारण यहाँ भी प्रवेश प्रक्रिया बेहद तनावपूर्ण रही।
सीटें सीमित होने और निजी संस्थाओं की अनियंत्रित कार्यप्रणाली के कारण हजारों मेधावी छात्र-छात्राएं बिना प्रवेश के रह गए हैं। पीड़ित छात्रों और अभिभावकों ने राज्य सरकार व शासन से इस पूरी प्रक्रिया का संज्ञान लेने, अतिरिक्त सीटों के प्रबंधन तथा अवैध वसूली करने वाले कॉलेजों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।