Miracle of Sai baba: पानी से जलाए दीए! जानिए सांई बाबा के 10 अलौकिक चमत्कार 

एक ऐसी शक्ति भी है जिसके आगे विज्ञान भी नतमस्तक हो जाता है। हम बात कर रहे हैं शिरडी के साईं बाबा की। 'सबका मालिक एक' का संदेश देने वाले साईं बाबा के चमत्कारों की गूंज आज भी करोड़ों भक्तों के दिलों में धड़कती है। प्रमाणिक ग्रंथ 'श्री साईं सच्चरित्र' में दर्ज बाबा की वो 10 अलौकिक घटनाएं

Miracle of Sai baba: पानी से जलाए दीए! जानिए सांई बाबा के 10 अलौकिक चमत्कार 

साईं बाबा का चमत्कार: आज के आधुनिक और वैज्ञानिक युग में जहां हर बात को तर्क की प्रतिष्ठा माना जाता है, वहीं एक ऐसी शक्ति भी है जिसके आगे विज्ञान भी प्रचलित है। हम बात कर रहे हैं शिरडी के साईं बाबा की। 'सबका मालिक एक' का संदेश देने वाले साईं बाबा के चमत्कारों की गूंज आज भी करोड़ों भक्तों के दिलों में धड़कती है। पौराणिक ग्रंथ 'श्री साईं सच्चरित्र' में बाबा की 10 अलौकिक घटनाएं दर्ज हैं, जो आज भी मनुष्यों को विस्मित करती हैं।
जब तेल ख़त्म हो गया, तो पानी से जगमगा रोज़ उठ गया, शिरडी
बाबा शाम को मस्जिद में जला देते थे। एक दिन स्थानीय सूर्य ने बाबा को मुफ्त में तेल देने से इनकार कर दिया। बाबा को बिना बताए मस्जिद में ठहराया, दीयों में पानी भरा और जला दिया। ये था चमत्कार कि वे नीचे दिए गए पानी से भी रात भर बिना बुझे जलते रहे।
फोर्ट पीसकर कैथेड्रल दी जाजा महामारी
एक बार शिरडी गांव में भयंकर हैजा महामारी की चपेट में था। बाबा ने डोली और फ़्लोरिडा चलाना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने गांव की सीमा पर एटे रेस्टोरेंट को बर्बाद कर दिया। देखते ही देखते महामारी गांव से पूरी तरह गायब हो गया। ये बाबा जन-कल्याण की अलौकिक शक्ति का प्रतीक थे।
जब तूफ़ान के आगे ढाल बन गए बाबा
एक बार शिरडी में भीषण मूसलाधार बारिश और तूफ़ान आया। द्वारकामाई मस्जिद की खंडहर छत ही गिरा दी गई थी। तब बाबा ने अपने हाथ से आकाश की ओर उठने और तूफान को शांत होने का आदेश दिया। नेचर ने तुरंत बाबा की आज्ञा मानी और सब कुछ छोड़ दिया।
जलती धूनी से बच्चे को जीवनदान
द्वारकामाई में सदैव जलने वाले पवित्र 'धूनी' बाबा की लीलाएँ हैं। एक बार एक बच्चा गलती से धूनी की भीषण आग में गिर गया। बाबा ने बिना सोचे अपना हाथ जलती आग में डाल दिया और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। आश्चर्य की बात यह थी कि न तो बच्चे को झटका लगा और न ही बाबा का हाथ जला।
मृत्यु के मुहाने से
बाबा के अनन्य भक्त महालसापति जब जीवन के अंतिम अवतार में थे और उनके प्राण छूटने वाले थे, तब बाबा ने यमदूतों को ललकारते हुए कहा था कि अभी उनका समय नहीं आया है। बाबा के वचनों के कारण महलसापति का नया जीवन मिला।
हाथ में तेल डाला गया, पर एक भी
बड़ा यज्ञ के दौरान कड़ाही में तेल नहीं डाला जा रहा था। बाबा ने खाना बनाने के लिए अपने अंतिम हाथ में नारियल वाला तेल डाल दिया। उपस्थित लोग डर से कांप उठे, लेकिन जब बाबा ने अपना हाथ बाहर निकाला, तो वह पूरी तरह से सामान्य और ठंडे थे।
पानी की लहरों पर यात्रा
के लिए साईं बाबा के पंचतत्व (अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश) के खिलौने थे। एक बार नदी पार करने के लिए बाबा ने किसी का सहारा नहीं लिया, बल्कि वे पानी की सतह पर तैरते या पैदल चलते थे, जिसे देखने वाले लोग अवाक रह गए
गणेश भाई का खोया घोड़ा और बाबा के दिव्य दर्शन वाले
धनी चंद व्यापारी भाई का प्रिय घोड़ा जंगल में कहीं खो गए थे। थक-हारकर जब वह बाबा से मिले, तो बाबा ने अपने दिव्य दर्शन से कोसों दूर ही घोड़े की पहेली बता दी। भाई चाँद यहाँ क्षेत्र तो उनका घोड़ा जहाँ चर रहा था।
समय के पार: काकासाहेब को मिली ट्रेन की चाबी
यात्रा के दौरान काका साहेब मठ की बेहद कठिन ट्रेन की चाबी गिर गई थी। वे परेशान थे क्योंकि ट्रेन छूटने वाली थी। तब बाबा ने शिरडी में बैठे-बैठे ही अपनी लीला से चमत्कारिक रूप में उनके निकट पहुँचे और उनकी सफल यात्रा की।
कड़वे नीम को कर दिया जैसा कि शहद की मिठाई
शिरडी के गुरुस्थान में आज भी वह नीम का पेड़ मौजूद है, जिसके नीचे बाबा थे। कुदरती तौर पर नीम बेहद घृणित है, लेकिन बाबा के स्पर्श और उपस्थिति के कारण वह पेड़ की मिठाइयां बन गईं, जो आज भी भक्तों को प्रसाद के रूप में बताती हैं।