शिक्षा के सफर को लगे 'पिंक' पंख: पूर्णिया की बेटियों के सपनों को रफ्तार देगी 'गुलाबी एक्सप्रेस'!

बिहार का पूर्णिया जिला अब एक नए और गौरवशाली बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों की बेटियों को उच्च शिक्षा के शिखर तक पहुंचाने के लिए बिहार सरकार और जिला प्रशासन 'पिंक बस सेवा' की सौगात लेकर आया है।

शिक्षा के सफर को लगे 'पिंक' पंख: पूर्णिया की बेटियों के सपनों को रफ्तार देगी 'गुलाबी एक्सप्रेस'!
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पूर्णिया: बिहार का पूर्णिया जिला अब एक नए और गौरवशाली बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों की बेटियों को उच्च शिक्षा के शिखर तक पहुंचाने के लिए बिहार सरकार और जिला प्रशासन 'पिंक बस सेवा' की सौगात लेकर आया है। यह पहल सिर्फ एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि पूर्णिया की बेटियों के हौसलों को उड़ान देने वाला एक चलता-फिरता सुरक्षा कवच है। अब न तो दूरी पढ़ाई में बाधा बनेगी और न ही सुरक्षा की चिंता सपनों को रोकेगी। पूर्णिया की सड़कों पर दौड़ने वाली यह 'गुलाबी एक्सप्रेस' महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखने को तैयार है।
₹10 में सपनों की उड़ान
महंगाई के इस दौर में जहां ऑटो और निजी वाहनों का किराया आसमान छू रहा है, वहीं सरकार ने छात्राओं के लिए किराया मात्र ₹10 निर्धारित किया है। ₹10 के इस टोकन किराए की वजह से अब गरीब से गरीब परिवार की बेटी भी बिना किसी आर्थिक तंगी के कॉलेज जा सकेगी। इसके साथ ही, रोज सफर करने वाली छात्राओं के लिए बेहद किफायती मासिक स्टूडेंट पास (Monthly Pass) की सुविधा भी दी जा रही है, जो शिक्षा को हर घर तक सुलभ बनाएगी।
छह प्रखंडों के नए डिग्री कॉलेजों को जोड़ेगा 'गुलाबी सफर'
पूर्णिया के जिन 6 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज स्थापित किए गए हैं, वहां की छात्राओं को सीधे जोड़ने के लिए विशेष रूट तैयार किए गए हैं।रुपौली, जलालगढ़, श्रीनगर, के. नगर, बैसा और अमौर प्रखंडों के सुदूर गांवों से सीधे कॉलेजों तक इन बसों का परिचालन होगा। बसों का समय पूरी तरह से कॉलेज की टाइमिंग के अनुसार (सुबह खुलने और दोपहर में बंद होने के वक्त) सेट किया गया है, ताकि छात्राओं का एक भी मिनट बर्बाद न हो।इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में बियाडा मरंगा, लाइन बाजार, कोर्ट स्टेशन, गुलाबबाग और हवाई अड्डा जैसे व्यस्त इलाकों से लेकर पूर्णिया-कटिहार और कसबा-रानीपतरा मार्ग पर भी पिंक बसें महिलाओं को सुरक्षित सफर का अहसास करा रही हैं।
हाई-टेक सुरक्षा: पैनिक बटन और सीसीटीवी से लैस
बेटियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है। इन पिंक बसों को पूरी तरह से अत्याधुनिक और सुरक्षित बनाया गया है। किसी भी आपात स्थिति में छात्राएं इसे दबाकर सीधे जिला कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज सकेंगी। पूरी यात्रा के दौरान बस की लाइव लोकेशन ट्रैक होगी और अंदरूनी गतिविधियों पर तीसरी आंख की नजर रहेगी। सफर के दौरान छात्राओं को सुरक्षित और सहज माहौल देने के लिए बसों में विशेष तौर पर महिला संवाहकों (Conductors) को तैनात किया गया है।छात्राओं की सुविधा के लिए सीटों के पास मोबाइल चार्जिंग पॉइंट और 'चलो ऐप' (Chalo App) के जरिए बस की लाइव लोकेशन देखने की सुविधा भी मिलेगी।
'शिक्षित और आत्मनिर्भर पूर्णिया' की नई तस्वीर
जिलाधिकारी अंशुल कुमार के नेतृत्व में जिला प्रशासन इस योजना को पूरी मुस्तैदी से धरातल पर उतार रहा है। पूर्णिया की छात्राओं और कामकाजी महिलाओं में इस योजना को लेकर जबरदस्त उत्साह और खुशी का माहौल है। पूर्णिया की सड़कों पर दौड़ती ये खूबसूरत पिंक बसें इस बात का प्रतीक हैं कि जब बेटियों को सुरक्षा और सहूलियत का साथ मिलता है, तो वे हर मंजिल को फतह कर लेती हैं। यह शुरुआत बदलाव का वह शंखनाद है, जो आने वाले समय में पूर्णिया के ड्रॉप-आउट रेट को शून्य पर ले जाएगा और हर बेटी को कॉलेज की दहलीज तक पहुंचाएगा।